Thursday, September 13, 2012

"Afsana Likh Rahi Hoon" - Munavvar Sultana

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***SHRADDHANJALI***

SHRI PREM KRISHNA TANDON


(A Delhi based Film Historian & Columnist)

06.01.1931 - 15.08.2012

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अफ़साना लिख रही हूं” - मुनव्वर सुल्ताना

                 ............शिशिर कृष्ण शर्मा

मुनव्वर सुल्ताना !...ये नाम है 1940 के दशक की उन स्टार अभिनेत्री का, जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी प्रतिभा के दम पर हिन्दी फ़िल्मों में नई ऊंचाईयां हासिल कीं, शोख अदाओं से लाखों दर्शकों को अपना दीवाना बनाया और फिर एकाएक गृहस्थी बसाकर फ़िल्मोद्योग को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। तमाम सिनेमाई चमक-दमक से अलग ये गुमनामी भरी ज़िंदगी उन्हें इतनी रास आई कि वो घर की चारदीवारी में सिमटती चली गयीं। और फिर धीरे-धीरे हालात यहां तक पहुंच गए कि हिन्दी सिनेमा के उनके समकालीन लोगों तक के ज़हन से उनका नाम मिट गया। लोग भूल ही गए कि वो कहां और किस हाल में हैं। एक आम धारणा ये भी बन चुकी थी कि मुनव्वर सुल्ताना शायद अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन सच्चाई ये थी कि मुनव्वर सुल्ताना 5 साल पहले तक ज़िंदा थीं और अपने भरे-पूरे परिवार के साथ मुंबई के पाली हिल इलाक़े में रहती थीं। ये बात अलग है कि उनकी शारीरिक और मानसिक हालत को देखते हुए उनका होना या होना कोई मायने नहीं रखता था।

मुनव्वर सुल्ताना के व्यवसायी बेटे सरफ़राज़ और बेटी शाहीन के मुताबिक़ उनकी अम्मी का जन्म 8 नवंबर 1924 को लाहौर में हुआ था। मुनव्वर सुल्ताना के अब्बा रेडियो अनाऊंसर थे। वो बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं और स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल की तैयारियों में जुटी हुई थीं। उन्हीं दिनों उन्हें लाहौर स्थितपंचोली पिक्चर्सके मालिक और मशहूर निर्माता-निर्देशक दलसुख पंचोली की फ़िल्मख़ानदानमें एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौक़ा मिला। साल 1942 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म के नायक-नायिका प्राण और नूरजहां और संगीतकार ग़ुलाम हैदर थे और ये फ़िल्म अपने दौर की बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी।

मुंबई के जाने-माने अभिनेता और निर्माता-निर्देशक मज़हर ख़ान उन दिनों फ़िल्मपहली नज़रकी नायिका की भूमिका के लिए एक नयी लड़की की तलाश में थे। फ़िल्मख़ानदानमें मुनव्वर सुल्ताना के काम से वो इतने प्रभावित हुए किपहली नज़रकी उस भूमिका के लिए उन्होंने मुनव्वर सुल्ताना को चुना और उन्हें लाहौर से मुंबई बुला लिया। साल 1945 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म में मुनव्वर सुल्ताना के नायक थे मोतीलाल। मुकेश ने भी इसी फ़िल्म से बतौर पार्श्वगायक अपना करियर शुरू किया था।

मुकेश इससे पहले फ़िल्मनिर्दोष(1941) औरदुखसुख(1942) में ख़ुद के लिए कुछ गीत गा चुके थे। फ़िल्मपहली नज़रका मुकेश का गाया पहला पार्श्वगीतदिल जलता है तो जलने देमोतीलाल पर फ़िल्माया गया था। डॉ.सफ़दरआहके लिखे इस गीत को अनिल बिस्वास ने संगीतबद्ध किया था।

ख़ानदान(1942) के बाद क़रीब 12 सालों के अपने करियर के दौरान मुनव्वर सुल्ताना ने कुल 26 फ़िल्मों, ‘पहली नज़र(1945/ नायक-मोतीलाल), ‘अंधों की दुनिया(1947/महिपाल), ‘दर्द(1947/नुसरत कारदार), ‘ऐलान(1947/सुरेन्द्र), ‘नैया’ (1947/मज़हर ख़ान), ‘मजबूर(1948/श्याम), ‘मेरी कहानी(1948/सुरेन्द्र), ‘पराई आग(1948/उल्हास), ‘सोना(1948/मज़हर ख़ान), ‘दादा(1948/श्याम), ‘दिल की दुनिया (1949/मज़हर ख़ान), ‘क़नीज़(1949/श्याम), ‘निस्बत(1949/याक़ूब), ‘रात की रानी(1949/श्याम), ‘सावन भादों(1949/रामसिंह), ‘उद्धार(1949/देव आनंद), ‘बाबुल(1950/दिलीप कुमार), ‘प्यार की मंज़िल(1950/रहमान), ‘सबक(1950/करण दीवान), ‘सरताज़(1950/मोतीलाल), ‘अपनी इज़्ज़त(1952/मोतीलाल), ‘तरंग, (1952/अजीत), ‘एहसान(1954/शम्मी कपूर), ‘तूफ़ान(1954/सज्जन), ‘वतन(1954/त्रिलोक कपूर) औरजल्लाद(1956/नासिर ख़ान) में बतौर नायिका काम किया। उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने दौर की हरेक टॉप नायिका से मॉडलिंग करवाने के लिए मशहूरलक्ससाबुन के विज्ञापन के लिए उस ज़माने में उन्होंने भी काम किया था।


उमादेवी का गाया पहला गीत, फ़िल्म दर्द काअफ़साना लिख रही हूंऔर इसी फ़िल्म के लिए सुरैया और उमादेवी का गायाबेताब है दिलमुनव्वर पर ही फ़िल्माए गए थे। मुनव्वर और दिलीप कुमार के लिए फ़िल्मबाबुलमें शमशाद बेगम और तलत महमूद का गायामिलते ही आंखें दिल हुआ दीवाना किसी काभी अपने ज़माने में काफ़ी मशहूर हुआ था। उधर मास्टर ग़ुलाम हैदर और हंसराज बहल द्वारा संगीतबद्ध की गयी फ़िल्मकनीज़को इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसका पार्श्वसंगीत तैयार करके संगीतकार .पी.नैयर ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था।

फ़िल्ममेरी कहानीऔरप्यार की मंज़िलका निर्माणसुपर टीम फ़ेडरल प्रोडक्शंसके बैनर में मुम्बई के जाने-माने फ़र्नीचर व्यवसायी शरफ़ अली ने किया था। साल 1954 में मुनव्वर सुल्ताना ने शरफ़ अली से शादी करके फ़िल्मोद्योग को अलविदा कह दिया।जल्लादउनकी आख़िरी फ़िल्म थी जो उनकी शादी के बाद रिलीज़ हुई थी। साल 1966 में शौहर के अचानक गुज़र जाने के बाद चार बेटों और तीन बेटियों के साथ ही बिज़नेस की भी ज़िम्मेदारियों को मुनव्वर ने बख़ूबी संभाला, और इन्हीं व्यस्तताओं के चलते फ़िल्मोद्योग से उनका बचा-खुचा रिश्ता भी पूरी तरह से टूट गया। और फिर गुज़रते वक़्त के साथ पीछे छोड़ गया एक सवाल, ‘क्या मुनव्वर सुल्ताना ज़िंदा हैं?’ 

साप्ताहिकसहारा समयके अपने कॉलमक्या भूलूं क्या याद करूंके लिए मैं मुनव्वर सुल्ताना का इण्टरव्यू करना चाहता था। उनकी तलाश में जिससे भी मिला, सभी ने कहा, ‘शायद वो ज़िंदा नहीं हैं और येशायदशब्द मेरी बेचैनी को लगातार बढ़ाए जा रहा था। मुझे एक भी शख़्स ऐसा नहीं मिला जो दावे के साथ कह सके किमुनव्वर सुल्ताना अब इस दुनिया में नहीं हैं

अचानक एक रोज़ मुझे श्री प्रेमकृष्ण टंडन ने फ़ोन किया जो दिल्ली के रहने वाले थे और अपने बेटे के पास मुंबई आए हुए थे। उन्होंने बताया कि वो भी कभीकभार दिल्ली से निकलने वाले अख़बारों में पुरानी हिंदी फ़िल्मों पर लिखते हैं। वो मेरे कॉलम के प्रशंसक थे और मुझसे मिलना चाहते थे। मेरा नंबर उन्हेंसहारा समयके मुंबई ब्यूरो चीफ़ धीरेन्द्र अस्थाना जी से मिला था। धीरेन्द्र अस्थाना जी तक वो नौएडा स्थित सहारा समय के दफ़्तर के ज़रिए पहुंचे थे। पुरानी हिंदी फ़िल्मों के अच्छे जानकार और 75 साल के बुज़ुर्ग श्री प्रेमकृष्ण टंडन से मिलना ही अपने आप में एक उपलब्धि थी। बातचीत के दौरान अचानक उन्होंने सवाल किया, बेटा तुम मुनव्वर सुल्ताना के बारे में क्यों नहीं लिखते?...और तब मुझे पता चला कि मुनव्वर सुल्ताना ज़िंदा हैं और मुंबई में ही हैं। मुनव्वर सुल्ताना के घर का फ़ोन नंबर भी मुझे श्री प्रेमकृष्ण टंडन ने ही दिया था। दरअसल श्री प्रेमकृष्ण टंडन 3 साल पहले मुनव्वर सुल्ताना के घर जाकर उनसे मिल चुके थे, हालांकि उनके अनुसार मुनव्वर सुल्ताना की हालत को देखते हुए उनका होना होना बराबर था।

(हमें दुख है कि विगत 15 अगस्त 2012 को श्री प्रेमकृष्ण टंडन का 82 साल की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया। दिवंगत आत्मा को टीमबीते हुए दिनकी ओर से हार्दिक श्रद्धांजलि !)  

मार्च 2005 के तीसरे हफ़्ते में मैं मुनव्वर सुल्ताना के घर पर था। वो पाली हिल के अंबेडकर रोड पर बनेसहगल हाऊसकी दूसरी मंज़िल पर रहती थीं। व्हीलचेयर पर बैठी, ख़ामोशी से शून्य में ताकतीं, दुनिया जहान ही नहीं ख़ुद से भी बेख़बर! पिछले आठ बरसों से वो अल्ज़ाईमर से पीड़ित थीं, एक ऐसी लाईलाज बीमारी जिसमें दिमाग़ धीरे-धीरे अपनी सक्रियता खोने लगता है। दुर्भाग्य से मुनव्वर सुल्ताना की बीमारी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी उनके बारे में तमाम बातचीत उनके बेटे सरफ़राज़ और बेटी शाहीन से हुईं। सरफ़राज़ और शाहीन का कहना था, ‘अम्मी को इस रोग से छुटकारा दिला पाना तो हमारे बस में नहीं है, लेकिन हमारी भरसक कोशिश यही रहती है कि वो जब तक हैं, उन्हें कोई तकलीफ़ पहुंचे। हालांकि ये भी सच है कि अब वो इस हालत में नहीं हैं कि सुख और दुख में फ़र्क महसूस कर सकें। वो एक ऐसे बुत में तब्दील हो चुकी हैं जिसमें कभी-कभार एकाध हल्की सी हरक़त हो ही जाती है

मुनव्वर सुल्ताना का निधन 83 साल की उम्र में 15 सितम्बर 2007 को मुंबई में हुआ।


We are thankful to

'Cine & TV Artistes Association' (CINTAA) for providing (Late) Mazhar Khan’s Picture. 

Mr. Harish Raghuvanshi & Mr. Harmandir Singh ‘Hamraz’ for their valuable suggestion, guidance and support.

Mr. S.M.M.Ausaja for providing movies’ posters.

Ms. Aksher Apoorva, Mr. Gajendra Khanna & Ms. Maitri Manthan for the English translation of the write ups.

Mr. Manaswi Sharma for the technical support including video editing.


"Afsana Likh Rahi Hoon" - Munavvar Sultana

                ...............Shishir Krishna Sharma

Munavvar Sultana…!!!...the star actress from 1940s who ruled the hearts her audience with her eternal beauty and amazing performances. She reached the heights of fame in a short span of time but gave it all up for domestic bliss. Completely devoted to her family, she moved away from the glitz and glamour of showbiz and with time her name faded into oblivion. Even her contemporaries did not know about her whereabouts, some even believed that she was no more. However, the truth is that though unwell, Munavvar Sultana lived with her family at Pali Hill area till 5 years back before her passing.

According to her businessman son, Sarfaraz and daughter Shaheen, their mother was born on 8th November 1924 in Lahore. Her father was a Radio Announcer. Since childhood she wanted to be a doctor and after completing school, she was preparing to enter the medical field. Around the same time, she got an opportunity to play a small role in the famous producer-director Dalsukh Pancholi, (owner of Lahore based “Pancholi Pictures”) film “Khandan”. Pran and Noorjehan were the lead pair of this hit film released in 1942 whose music director was Gulam Haider.

Mumbai’s famous actor/producer/director Mazhar Khan was looking for a new face for his film “Pehli Nazar”. After seeing her work in “Khandan”, he decided to cast Munavvar Sultana as the leading lady for his film and called her from Lahore to Mumbai. The leading man of this film released in 1945 was Motilal. Legendary singer Mukesh started his playback career with this film. Before this he had sung songs for Nirdosh (1941) and Dukhsukh (1942) which were picturized on Mukesh, himself. Sung by Mukesh, his first recorded playback song “Dil Jalta Hai To Jalne De”, written by Dr. Safdar ‘Aah’ and composed by Anil Biswas was picturized on Motilal.

After Khandan (1942) in a career spanning 12 years, Munavvar Sultana worked in 26 films as the leading lady – Pehli Nazar' (1945/Hero-Motilal), 'Andhon Ki Duniya' (1947/Mahipal), 'Dard' (1947/Nusrat Kardar), 'Elaan' (1947/Surendra), 'Nayya’ (1947/Mazhar Khan), 'Majboor' (1948/Shyam), ‘Meri Kahani’' (1948/Surendra), 'Paraai Aag' (1948/Ulhas), 'Sona' (1948/Mazhar Khan), 'Dada' (1948/Shyam), 'Dil Ki Duniya' (1949/Mazhar Khan), 'Kaneez' (1949/Shyam), 'Nisbat' (1949/Yaqoob), 'Raat Ki Rani' (1949/Shyam), 'Sawan Bhadon' (1949/Ram Singh), 'Uddhaar' (1949/Dev Anand), 'Babul' (1950/Dilip Kumar), 'Pyar Ki Manzil' (1950/Rehman), 'Sabak' (1950/Karan Dewan), 'Sartaz' (1950/Motilal ), ‘Apni Izzat' (1952/Motilal ), 'Tarang', (1952/Ajit), 'Ehsan' (1954/Shammi Kapoor), 'Toofan' (1954/Sajjan), 'Watan' (1954/Trilok Kapoor) and 'Jallaad' (1956/Nasir Khan). One can gauge her popularity from the fact that she modeled for the famous soap brand LUX which has featured every successful leading lady of her times. The first ever song sung by Umadevi, ‘Afsana Likh Rahi Hoon’ for the film 'Dard' (1947) and ‘Betab Hai Dil’ from the same film sung by Suraiya and Umadevi were picturized on Munavvar Sultana. The song 'Milte Hi Aankhein Dil Hua Deewana Kisika' from 'Babul' (1950) sung by Shamshad Begum and Talat Mehmood for Munavvar Sultana and Dilip Kumar was a chartbuster of its times. Her film 'Kaneez' (1949) composed by Master Ghulam Haider and Hansraj Behl is also famous for being O.P. Nayyar’s debut film. He did the background score of this film.

Films ‘Meri Kahani’ and ‘Pyar Ki Manzil’ were produced by Mumbai’s well-known Furniture Retailer, Sharaf Ali under the ‘Super Team Federal Productions’ Banner. In 1954 Munavvar Sultana married Sharaf Ali and bid adieu to the film world. Her last film ‘Jallaad’ was released after her marriage. In 1966 after the sudden demise of her husband, domestic (four sons and three daughters) and business responsibilities fell on her shoulders which she successfully handled. She was now completely disconnected from the film world and with passing only one question was left behind – “Is Munavvar Sultana alive?”

For my column ‘Kya Bhooloon Kya Yaad Karoon’ in the weekly ‘Sahara Samay’, I wanted to interview Munavvar Sultana but whoever I met in this regard said, “she is possibly not alive”. This uncertainty was making me uncomfortable. One day I received a call from Shri Prem Krishna Tandon, a resident of Delhi, who had come to visit his son in Mumbai. He told me that he occasionally wrote about old films for newspapers in Delhi. He was an admirer of my column and wanted to meet me. He got my contact information from Dhirendra Asthana, bureau chief for Sahara Samay, Mumbai who he reached through Sahara Samay’s NOIDA office. Meeting this 75 year old elderly gentleman with immense knowledge about vintage cinema was an achievement in itself. Surprisingly during our conversation, he suggested that I should write about Munavvar Sultana. He told me that she is very much alive and lived in Mumbai. He also gave me her contact information. Three years ago he met her at her Mumbai residence but given her condition, she was as good as dead.

(We are saddened that Shri Prem Krishna Tandon passed away on 15th August 2012 in Delhi at the age of 82. A heartfelt tribute from the team for “Beete Huye Din”.)

In the third week of March 2005, I visited Munavvar Sultana’s residence. She lived on the second floor of ‘Sehgal House’, Ambedkar Road, Pali Hill. Sitting quietly on a wheelchair, unaware of everything, even herself, she was staring at nothingness. For the past 8 years she was suffering from the incurable Alzheimer’s which was now in its last stages. I spoke to her son Sarfaraz and daughter Shaheen about her. They said – “We can’t give her riddance from this disease but try our best that while she is around, she should not have any problems, though at this stage she is beyond feeling any happiness or pain. She is like a statue which rarely shows any signs of life.”

Munavvar Sultana passed away on 15th September 2007 in Mumbai at the age of 83. 

12 comments:

  1. Sharma ji,
    Thank you for writing about MS,my fav actress of those days.I must have seen almost all of her films.
    One thing is very important.
    She had acted in Mehboob's ELAN-1947.Though she was a muslim herself,she had shown courage to act in this film,because this film was on the old and harmful customs of Muslims.It was actually a daring film in those days and as expected this film was banned for some time due to the objections of the traditional fundamentalists,who did not like the criticism.(More detailed info about ELAN is available on Cineplot).She was appreciated in those days for her courage.
    Thanks once again.
    -Arunkumar Deshmukh

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  2. thnx for the valuable information arunji...i saw cineplot....but i was disappointed to see her filmography there...they have included 'pyar', 'torpedo' and few other movies like 'babooji' in her filmography which is wrong. it was 'mehar (not munavvar)sultana' in 'pyar' and 'torpedo'.

    http://cineplot.com/munawwar-sultana-filmography/

    such silly mstakes clearly indicate the lack on proper research in their part thus how to rely upon them ???

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  3. Sharma ji,
    There are many mistakes in the info of various artists and from time to time I have written to them about these mistakes.Some have been corrected also,though some remain there still.
    We must,however,understand that Cineplot is not a site,it is a Blog,run by a single person.The entire Cineplot is so big that he has taken 4 Blogspaces of Wordpress together and Cineplot is hosted by his own server from USA.
    Once he wrote to me stating that though he knows about several mistakes-yet to be corrected,but finds it extremely difficult to do everything single-handedly.
    -AD

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  4. arunji, with all due respect to the person concerned, in such circumstances he shouldn't be in hurry...or he must make a team comproising of knowledgable people first...isn't it better NOT to post anything instead of furnishing wrong information???

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  5. Sharma ji,
    When Mr.ummer Siddique posted the info,it must have been in good faith and belief that it was true.
    It is only when some reader points out with proof that it is not correct,it will become a wrong info.
    I am not defending Ummer ji,but sympathising with him that allowing the wrong info to remain on the Blog,even after finding that it is wrong,is to be avoided at all costs.
    -AD

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  6. Just to correct a fact. The first film of Munawar Sultana was not "Khandaan" but "Khazanchi" also made by Pancholi where she is seen singing the song "peene ke din aaye". The song can be downloaded from youtube as well and she is clearly seen there.

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  7. @suhail kazim : thanks for the correction mr.kazim...this 'khandaan' information was provided by munavvar sultana's sister who was present at her house during my conversation with her son n daughter...due to her condition, MS was not in position to confirm this...on the other hand, despite all my efforts i couldn't cross check this information with any other source...i had no other option than to completely rely upon what her sister said...well i'v made the necessary correction, i thank you again !!!

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  8. You have really done an excellent job actually. Its so sad that no one even knows anything about such a famous actress

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  9. Many thanks for writing about Munawar Sultana. I always wondered where she be or what happened to her after departing movie industry? Likewise, I too thought she may be gone but per your writeup, we now know she lived till March 2005. It is sad she is gone now but there is closure to my curiosity.

    Indeed Indian movies have shed light on various social issues "across" the society. Still we face objections from public; and not long ago, wordings had to be changed in one of song of movie Nachle!

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  10. aap ne Munawar Sultana k baarey mein tafseeil se likhkar mujh jaisey old cinema k chaahney walon par bara ehsaan kiya hay.shukriya. Syed Ghulam Nabi,Karachi Pakistan.

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  11. Thanks for the post. http://retrore.blogspot.in/2016/02/munawar-sultana.html

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  12. Yes, I should not hesitate to admit that on seeing some shots of her song appearances, I fell for her - what a rare beauty embedded with wonderful singing sensation. God, whosoever you are - your act to push her last years in pain and miseries, is not pardonable. Let she come back in new Avatar with same face and same melodious voice to rule over Indian and Pakistani music lovers.

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