Friday, May 29, 2020

"Jhanak Jhanak Tori Baaje Payaliya" - Madhumati


झनक झनक तोरी बाजे पायलिया- मधुमती

                        ........शिशिर कृष्ण शर्मा

पचास  के  दशक के अंत में कुक्कू, हेलन और बेला बोस जैसी डांसर्स की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए ह्यूटौक्सी रिपोर्टर नाम की एक नई डांसर ने हिन्दी सिनेमा  कदम रखा था। फ़िल्म थी 1958 में बनी हरिश्चन्द्र जिसके प्रोड्यूसर रामूभाई देसाई और डायरेक्टर धीरुभाई देसाई थे। साहू मोदक और सुलोचना  की  मुख्य भूमिकाओं वाली इस पौराणिक फ़िल्म में संगीत सुशान्त बनर्जी का था। ह्यूटौक्सी ने इस फ़िल्म  के गीतआजा राजा आजा अब भी जापर डांस किया था। आने वाले समय में करीब पचास फ़िल्मों में बतौर डांसर काम करने के बाद ह्यूटौक्सी रिपोर्टर ने जब फ़िल्मों में एक्टिंग की शुरुआत की तो उन्हें नया नाम मिला, मधुमती करीब बीस साल के करियर के दौरान उन्होंने बेशुमार हिन्दी, मराठी, गुजराती, पंजाबी और बांग्ला फ़िल्मों में बतौर डांसर, हिरोईन और कैरेक्टर आर्टिस्ट  काम किया और फिर कैमरे को अलविदा कह दिया। कल 30 मई 2020 को 79 वर्ष की होने जा रहीं मधुमती जी पिछले चालीस सालों से .बी.नायर रोड (जुहू) स्थित अपने घर ही में डांस और एक्टिंग स्कूल चला रही हैं|

साल 2010 में मुझेराजस्थान पत्रिकाके लिए मधुमती जी का इंटरव्यू करने का मौक़ा मिला था| उस साल उन्हें लखनऊ में हुए समारोह में तेरहवेंलच्छू महाराज अवार्डसे सम्मानित किया गया था| उनके घर पर हुई उस मुलाक़ात में उन्होंने अपनी निजी और व्यावसायिक ज़िंदगी के बारे में खुलकर बातचीत की थी| उसके बाद भी कभीकभार फ़ोन पर हमारी बातचीत होती रही| हाल ही में मैं उनसे एक बार फिर से मिला| उद्देश्य था,बीते हुए दिन में प्रकाशित होने जा रहे उनके इंटरव्यू के लिए अपडेट्स लेना| आज उनका वोही इंटरव्यू आपके सामने है -   

30 मई 1941 को ठाणे के एक रईस पारसी परिवार में छह भाई बहनों के बीच जन्मीं मधुमती  के पिता ख़ान साहब दारा बहरामजी रिपोर्टर जज थे तो बड़े भाई पीलू रिपोर्टर अपने समय के जाने माने क्रिकेट अम्पायर। ठाणे के मशहूर स्कूल सेण्ट जॉन बैप्टिस्ट कॉन्वेंट में पढ़ाई के दौरान मधुमती ने 7 साल की उम्र से स्कूल में ही लखनऊ घराने के गुरु दुलारी श्रीवास्तव से कत्थक सीखना शुरु किया था। मधुमती जी बताती हैं, “मेरे पिता मेरे डांस सीखने के ख़िलाफ़ थे लेकिन गुरुजी के मनाने पर अनमने ढंग से उन्होंने मुझे इसकी इजाज़त दे दी थी। स्कूली पढ़ाई के दौरान ही मैंने मणिपुरी और कथाकली डांस सीखा। साथ ही गुरु आर.के.शेट्टी और गुरु चन्द्रशेखर पिल्लै से भरतनाट्यम की शिक्षा भी ली| स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने ठाणे में अपनी डांस एकेडमी खोल ली। उस वक्त मेरी उम्र महज़ 15 साल थी।

अपने स्टेज शोज़ के ज़रिए मधुमती बहुत जल्द एक बेहतरीन डांसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं। डायरेक्टर धीरुभाई देसाई ने ऐसे ही एक स्टेज शो में उनके डांस से प्रभावित होकर उन्हें फ़िल्म हरिश्चन्द्र में डांस का ऑफर दिया था। मधुमती के मुताबिक पहले तो पिता ने उन्हें फ़िल्मों में काम करने की इजाज़त देने से साफ इंकार कर दिया| लेकिन धीरुभाई के समझाने पर वो बहुत मुश्किल से राज़ी हो ही गए। ये फ़िल्म साल 1958 में रिलीज़ हुई थी| आगे चलकर मधुमती नेझनक झनक तोरी बाजे पायलिया’ (मेरे हुजूर), तेरे नैना तलाश करें जिसे’ (तलाश), आंखों आंखों में किसी से बात हुई’ (जानवर), लेदे सैयां ओढ़नी पंजाबी’ (पवित्र पापी), ‘टाईटल सांग (नाईट इन लंदन), किसी पर जान देते हैं’ (झुक गया आसमान), ‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा’ (शतरंज), मांगी हैं दुआएं हमने सनम(शिकारी), सुनो ज़िंदगी गाती है’ (पगला कहीं का), इश्क़ दौलत से ख़रीदा नहीं जाता’ (जब याद किसी की आती है), हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त  (ये रात फिर आएगी), मैं कयामत हूं’ (सुहागरात) औरचम्पावती तू आजा’ (अन्नदाता) जैसे सैकड़ों गीतों पर डांस किया। मधुमती कहती हैं, ‘मेरी शक्ल-सूरत हेलेन से इतनी ज्यादा मिलती थी कि ख़ासतौर से वेस्टर्न डांसेज में तो दर्शक मुझे पहचान ही नहीं पाते थे| कई लोग आज भी उन डांसेज को हेलेन का ही समझते हैं।

60 के दशक की शुरुआत में मधुमती ने मशहूर डांसर मनोहर दीपक के साथ मिलकरमधुमती-मनोहर दीपक कल्चरल ट्रूपबनाया। इससे पहले मनोहर दीपक सितारा देवी के ग्रुप से जुड़े हुए थे| मधुमती ने 35 सदस्यों के अपने इस ग्रुप के साथ उस दौर में दुनिया के कई देशों में स्टेज शोज़ किए। मधुमती जी बताती हैं, उन्हीं दिनों अचानक मनोहर दीपक की पत्नी गुजरीं तो डांस ग्रुप के साथ-साथ मुझे उनके चार छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल भी करनी पड़ी। चारों बच्चे मेरे साथ इतना हिलमिल गए थे कि साल 1965 में मुझे अपनी क़रीबी मित्र एक्ट्रेस नर्गिस के कहने पर मनोहर से शादी कर लेनी पड़ी।

मनोहर दीपक का असली नाम मनोहर सिंह काम्बोज था| वो पटियाला के एक किसान परिवार से थे| उन्हें डांस का और ख़ासतौर से भांगड़ा का बहुत शौक़ था| मधुमती बताती हैं,तीन भाईयों में सबसे छोटे मनोहर ने एक डांस ग्रुप बनाया था जिसमें उनके सगे और चचेरे भाई, दोस्त और रिश्तेदार लड़के शामिल थे| वो सब मिलकर खेतों में प्रैक्टिस किया करते थे

जल्द ही उनका ग्रुप इतना मशहूर हो गया कि राजकपूर ने फ़िल्मजागते रहोके सुपरहिट भांगड़ा गीततेकी मैं झूठ बोलिया, कोई ना भाई कोई नापर डांस करने के लिए मनोहर को ख़ासतौर से मुम्बई बुलाया था| इसके बाद मनोहर और उनके ग्रुप ने बी.आर.चोपड़ा की फ़िल्मनया दौरके गीतये देश है वीर जवानों कापर डांस किया था| फ़िल्मनया दौरऔर उसके गीत-संगीत की ज़बरदस्त कामयाबी के साथ ही मनोहर दीपक फिल्मों और स्टेज शोज़ में व्यस्त होते चले गए|


मधुमती ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत रणजीत मूवीटोन की फ़िल्मज़मीन के तारेसे की थी। 1960 में रिलीज़  हुई इस फ़िल्म के डायरेक्टर सरदार चंदूलाल शाह थे। मधुमती जी के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी परदे पर प्रेमदृश्यों में नज़र आए। फ़िल्मज़मीन के तारेमें मधुमती को उन्होंने एक्टिंग की इजाज़त सिर्फ़ इसलिए दी थी कि इस फ़िल्म  में मधुमती  के अपोज़िट कोई हीरो नहीं था। इस फ़िल्म  में मधुमती ने डेज़ी ईरानी की मां का रोल किया था| इसी फ़िल्म में उन्होंने अपने पिता की सलाह पर अपना नाम ह्यूटौक्सी रिपोर्टर से बदलकर मधुमती रखा था। इसके बाद उन्होंने सत्येन बोस की फ़िल्महम भी इंसान हैंसाईन की। इस फ़िल्म  में भी उनके अपोज़िट कोई हीरो नहीं था। ये फ़िल्मज़मीन के तारेसे पहले, साल 1959 में रिलीज़  हुई थी। इन दोनों ही फ़िल्मों में मधुमती पर एक भी गीत नहीं फ़िल्माया गया था।

मधुमती जी हमेशा से समाजसेवा में भी कला के ज़रिये अपना योगदान देती आयीं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान वो नेफ़ा बॉर्डर पर जाकर भारतीय जवानों का मनोबल बढ़ाने वाली पहली महिला कलाकार थीं। उस ट्रिप में उनके साथ राजकपूर, मनोहर दीपक, मुकेश, आगा और अनवर हुसैन भी शामिल थे। फिर उन्होंने सुनील दत्त, मनोहर दीपक, शम्मी आण्टी, अनवर हुसैन, तलत महमूद और प्रेम धवन के साथ मिलकर अजंता आर्ट्स बनाया जिसके मुखिया के तौर पर सुनील दत्त को चुना गया था। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान मधुमती ने अजंता आर्ट्स ट्रूप के साथ लद्दाख जाकर जवानों के लिए कई स्टेज शोज़ किए थे। 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान वो बांग्लादेश जाकर भारतीय  जवानों से मिली थीं जिसके लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया गया था।

मधुमती ने चन्द्रशेखर के साथ फ़िल्मचले हैं ससुराल(1966) में हीरोईन का रोल भी किया। फ़िल्मतलाश(1969) में वो क्लासिकल डांसर रुपाली के रोल में नजर आईं। फ़िल्मचरस(1976) में वो अमजद ख़ान की प्रेमिका लैला के निगेटिव रोल में तोअमर अकबर एन्थोनी(1977) में तवायफ़ बिजली बाई के रोल में दिखीं। मधुमती जी कहती हैं,फ़िल्मचरस में मुझ पर दो गानेमैं एक शरीफ़ लड़की बदनाम हो गयी औरये धुंआ मेहरबां चरस का नहीं है भी फ़िल्माए गए थे जिनमें मेरा साथ अरूणा ईरानी ने दिया था| इसके बाद मैंने बाक़ायदा प्रेस कांफ्रेंस करके फ़िल्मों से रिटायर होने का ऐलान कर दिया था| लेकिन तभी एक रोज़ मनमोहन देसाई ने मुझे फ़िल्म अमर अकबर एन्थोनीके लिए बुलाया| मैंने प्रेस कांफ्रेंस का हवाला देते हुए उन्हें इनकार कर दिया| लेकिन वो कहने लगे, सिर्फ़ गेस्ट अपीयरेंस है, चाहो तो आज रात को ही शूट कर लो| आख़िर मुझे उनकी बात माननी पड़ी| इस तरहअमर अकबर एन्थोनीमेरी आख़िरी रिलीज़ हिन्दी फ़िल्म साबित हुई| इसके बाद साल 1980 में सुनील गावस्कर के साथ मेरी एक मराठी फ़िल्मसावली प्रेमाचीज़रूर रिलीज़ हुई, जिसकी प्रोड्यूसर भी मैं ही थी| अब पिछले क़रीब चालीस सालों से मैंमाय विज़ननाम की अपनी एकेडमी में फिल्मी दुनिया में आने वाले नए कलाकारों को डांस और एक्टिंग के गुर सिखा रही हूं। अक्षय कुमार, गोविन्दा, तब्बू, चंकी पाण्डेय और अमृता सिंह जैसे मेरे कई शिष्य आज फ़िल्मों में अच्छा-ख़ासा मुक़ाम हासिल कर चुके हैं।


मधुमती के पति मनोहर दीपक ने 3 पंजाबी फ़िल्मोंखेलन दे दिन चार’, गीत बहारां देऔरधरती वीरां दीके अलावा 2 हिन्दी फ़िल्मेंसंगदिल(1967) और जय ज्वाला (1972) भी प्रोड्यूस की थीं|जय ज्वालाका नाम पहलेपूजा और पायलरखा गया था।1960 के दशक के अंत में मनोहर दीपक ने मीना कुमारी, विश्वजीत, के.एन.सिंह जैसे दिग्गज कलाकारों को लेकर बिग बजट फ़िल्मपानी शुरू की थी जिसके डायरेक्टर मनमोहन देसाई थे| संगीतकार शंकर जयकिशन ने इस फ़िल्म के लिए दो गाने रिकॉर्ड भी किये थे| इनमें एक बेगम अख्तर की गायी ठुमरी थीशराबे नाभ को दो आतिशां बना के पिला, जिस पर नृत्य करके सितारा देवी 1957 कीमदर इंडिया के 10 साल बाद एक बार फिर से फ़िल्म के परदे पर नज़र आतीं| दूसरा गाना आशा भोंसले की आवाज़ में एक लोरीगीत था, ‘तू सोने देना उसे तेरे अन्दर जो इंसान है| लेकिन 12 रील बन चुकी ये फ़िल्म मीना कुमारी के निधन की वजह से अधूरी रह गयी क्योंकि फिल्म का सिर्फ़ क्लाइमेक्स बाक़ी था जो मीना कुमारी पर फ़िल्माया जाना था| फ़िल्मपानीमें विश्वजीत के अपोज़िट मधुमती की छोटी बहन वैशाली थीं, जिन्होंने बूंद जो बन गयी मोती(1967), तीन बहूरानियां(1968), रातों का राजा(1970) औरचौकीदार (1974) जैसी कुछ और फ़िल्मों में काम किया था| वैशाली का असली नाम रूख़साना रिपोर्टर है और अब वो ठाणे शहर में अपनी डांस और एक्टिंग एकेडमी चला रही हैं।

मधुमती जी कहती हैं, मैंने मनोहर दीपक जी के चारों बच्चों को सगी मां बनकर पाला और बड़ा किया| दोनों बेटियों की शादी की, बड़ी बेटी कपूरथला में रहती है और छोटी बंगलौर में| उनसे छोटे दो बेटे थे, बड़ा बेटा अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहता है| लेकिन छोटा बेटा अपनी मां की तरह दिल की बीमारी से पीड़ित था| साल 2006 में अचानक ही वो गुज़र गया| मनोहर उस झटके से नहीं उबर पाए और एक महीने बाद 31 अक्टूबर 2006 को उनका भी देहांत हो गया| पति के गुज़रने के बाद मैंने खुद को पूरी तरह से अपनी एकेडमी के प्रति समर्पित कर दिया है। मेरे पास आज भी बहुत से बच्चे सीखने आते हैं| डांस के प्रति उनकी लगन हर बार मुझे भी एक नए जोश से भर देती है। अब तो बस यही तमन्ना है कि आखिरी सांस तक ऐसे ही इण्डस्ट्री में आने वाले नए बच्चों को सिखाती रहूं।‘ 

We are thankful to

Mr. Harish Raghuvanshi & Mr. Harmandir Singh ‘Hamraz’ for their valuable suggestion, guidance and support.

Mr. S.M.M.Ausaja for providing movies’ posters.

Mr. Gajendra Khanna for the English translation of the write up.

Mr. Manaswi Sharma for the technical support including video editing


Jhanak Jhanak Tori Baaje Payaliya” - Madhumati

                              ........Shishir Krishna Sharma

Towards the end of the Fifties, in the tradition of dancers like Cukoo, Helen and Bela Bose, a new dancer named Hutoxy Reporter entered the Hindi Cinema. The film the 1958 release, ‘Harishchandra’ whose producer was Ramubhai Desai and Director was Dhirubhai Desai. The composer for this Sahu Modak and Sulochana starrer mythological film was Sushant Banerjee. Hutoxy had danced to the film’s song ‘Aaja Raja Aaja Ab Aa Bhi Ja’. After working as a dancer in nearly 50 films, she started acting in films with a new name, Madhumati. During her nearly two-decade long career, she acted in various Hindi, Marathi, Gujarati, Punjabi and Bengali movies as a dancer, heroine and character artiste before bidding adieu to the camera. Madhumati ji who turned 79 years old on 30th May 2020, has been running a dance and acting school at her home on A B Nair Road, Juhu for the last forty years.

I had got the opportunity for interviewing her in 2010 for the ‘Rajasthan Patrika’. That year, she had been awarded the 13th ‘Lachhu Maharaj Award’ at a ceremony in Lucknow. During this conversation at her home, she had discussed her personal and professional life in detail with me. We used to occasionally talk on the phone after that. Recently, I met her once again to take updates on her interview for ‘Beete Hue Din’. Today, this interview is presented to you here: -   

Madhumati ji was born on 30th May 1941 in a rich Parsi family in Thane and had six brothers. While her father Khan Saheb Dara Behramji reporter was a Judge, her elder brother Piloo Reporter was a well-known cricket umpire of his time. While attending Thane’s famous School St John The Baptist Convent, Madhumati had started learning Kathak at the school itself under the tutelage of Lucknow style Guru Dulari Shrivastava at the age of just 7 years. Madhumati ji recalls, “My father was against my learning dance but thanks to Guru ji’s intervention, he reluctantly gave me permission to learn it. During my school studies I learnt Manipuri and Kathakali. Alongside, I also learnt Bharatnatyam from Gurus R K Shetty and Chandrashekhar Pillai. After completing my school education, I opened my own dance academy in Thane. I was merely 15 years old at that time.“

Through her stage shows, Madhumati soon made a name for herself as an excellent dancer. Director Dhirubhai Desai was impressed with her dancing skills during one such stage show and gave her the offer to dance for his film ‘Harishchandra’. According to Madhumati, her father was initially totally against her working for films but after lots of efforts by Dhirubhai, he with a lot of difficulty agreed for it. The film released in the year 1958. She went on to dance to multiple songs including Jhanak Jhanak Tori Baaje Payaliya’ (Mere Huzoor), Tere Naina Talaash Karen Jise’ (Talaash), Aankhon Aankhon Mein Kisi Se Baat Hui’ (Janwar), ‘Le De Saiyaan Odhni Punjabi’ (Pavitra Paapi), ‘Title Song’ (Night In London), ‘Kisi Par Jaan Dete Hain’ (Jhuk Gaya Aasmaan), ‘Jungle Mein Mor Nacha Kisne Dekha’ (Shatranj), ‘Maangi Hain Duaayen Humne Sanam’ (Shikari), Suno Zindagi Gaati Hai’ (Pagla Kahin Ka), Ishq Daulat Se Khareeda Nahin Jaata’ (Jab Yaad Kisi Ki Aati), Huzoorewala Jo Ho Ijaazat  (Ye Raat Phir Na Aayegi), Main Qayamat Hoon’ (Suhagraat) andChampawati Tu Aaja’ (Annadaata). Madhumati says, ‘My face resembled Helen so much that particularly in western dances, the viewers could not recognize me. Many people even today think that those dances are by Helen! ‘

In the early 1960s, Madhumati formed the ‘Madhumati-Manohar Deepak cultural troup’ with famous dancer Manohar Deepak. Earlier Manohar Deepak had been associated with Sitara Devi’s group. Madumati and her group comprising of 35 members gave stage shows in many countries around the world. Madhumati ji recalls, Around that time, when Manohar Deepak’s wife suddenly died, along with managing the dance group, the responsibility of his four small children also fell on me. All the four children had become so attached to me that in the year 1965, on the advice of my close friend Actress Nargis, I got married to Manohar.

Manohar Deepak’s real name was Manohar Singh Kamboj. He belonged to a farmer’s family from Patiala. He was very fond of dancing especially Bhangra. Madhumati ji says,The youngest among three brothers, Manohar had made his own dance group which comprised of his brothers, paternal cousins, friends and other male relatives. They all used to practice in the fields. Soon this group became so famous that Raj Kapoor specially invited him to dance to film Jaagte Raho’s superhit Bhangra song, ‘Te Ki Main Jhooth Boliya, Koi Na Bhai Koi Na’. After that Manohar and his troupe had also danced to B R Chopra’s film Naya Daur’s song ‘Ye Desh Hai Veer Jawanon Ka’. After the runaway success of film ‘Naya Daur’ and its songs, Manohar Deepak became really busy with films and stage shows.

Madhumati began her acting career with Ranjeet Movietone’s movie ‘Zameen Ke Taare’. The director of this 1960 release was Sardar Chandulal Shah. Madhumati ji’s father did not want his daughter to be visible on screen in romantic scenes. He agreed for her to act in the film, ‘Zameen Ke Taare’ only because there was no hero cast opposite her. In this film, Madhumati ji had played the role of Daisy Irani’s mother. With this film, on the advice of her father, She changed her name from Hutoxy Reporter to Madhumati. After this, she signed Satyen Bose’s film Hum Bhi Insaan Hain. In this film also, there was no hero opposite her. This film had released in 1959 before ‘Zameen Ke Taare’. No song had been picturized on her in both these films.

Madhumati ji always kept doing social service as well through her art. During the Indo-China war in 1962, She was the first female artist to go to the NEFA border to boost the morale of the soldiers there. During this trip, Raj Kapoor, Manohar Deepak, Mukesh, Agha and Anwar Hussain had also accompanied her. After that, she had along with Sunil Dutt, Manohar Deepak, Shammi Aunty, Anwar Hussain, Talat Mahmood and Prem Dhawan, laid the foundation of Ajanta Arts which was headed by Sunil Dutt. During the 1965 Indo-Pak war, Madhumati ji had gone with the Ajanta Arts troup to Ladakh and done many stage shows for the Army Jawaans.  During the 1971, Indo-Pak war, she had gone and met the troops in Bangladesh for which She had also been commended by the President of India himself.

Madhumati acted opposite Chandrashekhar as the heroine in the film ‘Chale Hain Sasuraal’ (1966). In film ‘Talaash’ (1966), She was seen in the role of classical dancer Rupali. In film ‘Charas’ (1976), She was soon in the negative role of Amjad Khan’s lover Laila while in ‘Amar Akbar Anthony’ (1966), She was seen as the courtesan Bijli Bai. She remembers,In the film ‘Charas’, two songs ‘Main Ek Shareef Ladki Badnaam Ho Gayi’ and Ye Dhuaan Meharbaan Charas Ka Nahin Hai’ in which Aruna Irani had participated with me. After that, I had actually called a press conference and declared my retirement from films. But then, one day, Madanmohan Desai, invited me for his film ‘Amar Akbar Anthony’. I cited the press conference and tried to decline the offer. He then, started saying, that it was just a guest appearance and It can be shot at night. I had to finally agree to his proposal. Thus, ‘Amar Akbar Anthony’ proved to be my last Hindi release. After that, I did have a Marathi release, ‘Sawali Premachi’ along with Sunil Gavaskar which had been produced by me. Now, since the last forty years, I have been running my academy, ‘My Vision’ where I have been teaching the art of dance and acting to many new artists trying to enter the film industry. Many of my students like Akshay Kumar, Govinda, Tabu, Chunkey Pandey and Amrita Singh have made a name for themselves in films.

Madhumati’s husband Manohar Deepak had also produced three Punjabi films, ‘Khedan De Din Chaar’, ‘Geet Baharan De’ and ‘Dharti Veeran Di’ as well as two Hindi films, ‘Sangdil’ (1967) and ‘Jai Jwala’ (1972). ‘Jai Jwala’ had initially been named, ‘Pooja Aur Payal’.

Towards the end of 1960s, Manohar Deepak had started a big budget film ‘Paani’ which was directed by Manmohan Desai starring stalwarts like Meena Kumari, Biswajit and K N Singh. Composers Shankar-Jaikishan had recorded two songs as well for the film. Of these was a Begum Akhtar sung thumri, Sharaab-e-Naabh Ko Do Aatishaan Bana Ke Pila’ which would have marked the dance performance of Sitara Devi over ten years after ‘Mother India’. The second song was a lori sung by Asha Bhosle, ‘Tu Sone Na Dena Use Tere Andar Jo Insaan Hai’. Unfortunately, though 12 reels of the movie had been recorded, it remained incomplete because It’s climax which was to be picturized on Meena Kumari, could not be shot due to her sad demise. In the film, ‘Paani’, Madhumati’s younger sister, Vaishali had been cast opposite Biswajeet. Her sister had worked in a few films, including Boond Jo Ban Gayi Moti’ (1967), Teen Bahuranian’ (1968), ‘Raaton Ka Raja’ (1970) and Chowkidar’ (1974). Vaishali’s real name is Rukhsana Reporter and she now runs her own Dance and Acting Academy in Thane.

Madhumati ji says, I brought up Manohar Deepak ji’s four children as my own. Both daughters are married. The elder one stays in Kapurthala while the younger one in Bangalore. Both sons were younger to them. The elder one stays with his family in Australia. Unfortunately, the younger son was suffering from a heart ailment like his mother due to which he suddenly died in 2006. Manohar ji could not recover from the shock and sadly passed away a month later on 31st October 2006. After his demise, I have dedicated myself totally to my academy. Today also many children come to learn dance from me. Their dedication towards dance continues to invigorate me till today. Now, my only aim is to continue to teach children coming into the film industry till my last breath.