Tuesday, September 25, 2012

“Manzil Ki Dhun Me Jhoomte” - Prem Adib

मंज़िल की धुन में झूमते गाते चले चलो”-प्रेम अदीब 

     ............शिशिर कृष्ण शर्मा

कहते हैं कि गांधीजी ने अपने जीवन में सिर्फ़ एक फ़िल्म, ‘रामराज्यदेखी थी। साल 1943 मेंप्रकाश पिक्चर्सके बैनर में बनी इस धार्मिक फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक विजय भट्ट, गीतकार रमेश गुप्ता और संगीतकार थे शंकर राव व्यास। सीता बनीं शोभना समर्थ के साथ परदे पर राम की भूमिका में नज़र आने वाले अभिनेता थे प्रेम अदीब, जिनका नाम उस दौर के फ़िल्म प्रेमियों के ज़हन में आज भी ताज़ा है। 1930 के दशक के मध्य में सामाजिक फ़िल्मों से अपना करियर शुरू करने वाले अभिनेता प्रेम अदीब 1940 के दशक में धार्मिक फ़िल्मों का एक मशहूर नाम बन चुके थे। क़रीब 25 सालों में कुल 67 फ़िल्मों में अभिनय करने वाले प्रेम अदीब का फलता-फूलता करियर बदक़िस्मती से उनके आकस्मिक निधन के साथ ही ख़त्म हो गया था। काफ़ी कोशिशों के बाद हाल ही में हमारी मुलाक़ात स्वर्गीय प्रेम अदीब की पत्नी श्रीमती प्रतिमा अदीब से हुई और हम प्रेम अदीब के बारे में तमाम जानकारियां जुटाने में कामयाब हुए।

कश्मीरी मूल के प्रेम अदीब के दादा-परदादा अवध के नवाब वाजिद अली शाह के ज़माने में काश्मीर छोड़कर अवध के शहर फ़ैज़ाबाद (अब उत्तरप्रदेश) में बसे थे। उनके दादा का नाम देवीप्रसाद दर था। प्रेम अदीब के पिता रामप्रसाद दर फ़ैज़ाबाद से सुल्तानपुर चले आए थे जहां 10 अगस्त 1916 को प्रेम अदीब का जन्म हुआ था। नाम रखा गयाशिवप्रसाद श्रीमती प्रतिमा अदीब (चित्र में) के अनुसार, उर्दू केअदबलफ़्ज़ से बनीअदीबकी उपाधि से नवाब वाजिद अली शाह द्वारा नवाज़े जाने के बाददरपरिवार कोअदीबके नाम से जाना जाने लगा था।

प्रेम अदीब का झुकाव बचपन से ही फ़िल्मों की तरफ़ था। बोलते सिनेमा की शुरूआत हो चुकी थी। मुंबई के साथ-साथ कोलकाता और लाहौर भी फ़िल्म-निर्माण का केन्द्र बनकर उभर रहे थे। एक रोज़ प्रेम अदीब ने घर छोड़ा और फ़िल्मों में काम करने की तमन्ना लिए कोलकाता चले गए। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद काम नहीं मिला तो लाहौर पहुंचे। लेकिन वहां भी कामयाबी नहीं मिली तो आख़िर में वो मुंबई चले आए।

साल 1936 में प्रेम अदीब की पहली फ़िल्मरोमांटिक इंडियाप्रदर्शित हुई।राजपूताना फ़िल्म्सके बैनर में बनी इस फ़िल्म के लेखक-निर्देशक मोहन सिन्हा थे। उस दौर के मशहूर अभिनेता पंडित बद्री प्रसाद द्वारा संगीतबद्ध इस फ़िल्म में प्रेम अदीब के साथ नूरजहां, स्नेहलता, श्यामसुंदर और पंडित बद्री प्रसाद के अलावा काश्मीरी मूल के एक अन्य अभिनेता .के.दर ने भी काम किया था जो आगे चलकरजीवनके नाम से मशहूर हुए। प्रेम अदीब को उनके असली नाम शिवप्रसाद की जगह फ़िल्मी नामप्रेम’, मोहन सिन्हा ने ही दिया था।

(माना जाता है कि अभिनेत्री विद्या सिन्हा इन्हीं मोहन सिन्हा (चित्र में) की बेटी हैं लेकिन संगीतकार जोड़ीसोनिक-ओमीके ओमी जी के मुताबिक़ मोहन सिन्हा विद्या सिन्हा के पिता नहीं बल्कि नाना थे। चूंकि विद्या सिन्हा की मां उनके जन्म के समय ही गुज़र गयी थीं इसलिए विद्या सिन्हा को उनके नाना मोहन सिन्हा ने सिर्फ़ पाला था, बल्कि उनका नाम भी अपनी स्वर्गीया बेटी के नाम परविद्याही रखा था। विद्या सिन्हा के पिता का नाम सरदार मानसिंह राणा था जिन्होंने कॉमरेड प्रताप राणा के नाम से निर्माता हल्दिया के साथ मिलकर फ़िल्म परवाना’(1947) और बतौर स्वतंत्र निर्माता फ़िल्म विद्या’ (1948) और जीत’ (1949) बनाईं| जीत उनकी पहली पत्नी का नाम था जिनके गुज़र जाने के बाद उन्होंने निर्देशक मोहन सिन्हा की बेटी विद्या के साथ दूसरा विवाह किया था। कॉमरेड प्रताप राणा ओमी जी के सगे मामा थे, और इस रिश्ते से विद्या सिन्हा ओमीजी की ममेरी बहन हैं।

फ़िल्म रोमांटिक इंडियाके बाद प्रेम अदीब नेदरियानी प्रोडक्शंसकीफ़िदा--वतन’, ‘प्रतिमा(दोनों 1936) औरइंसाफ़(1937),मिनर्वा मूवीटोनकीख़ान बहादुर(1937) औरतलाक़(1938) जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया।जनरल फ़िल्म्सकी साल 1938 में प्रदर्शित हुई फ़िल्मइंडस्ट्रियल इंडियामें प्रेम अदीब पहली बार हीरो बने। इस फ़िल्म के निर्देशक भी मोहन सिन्हा ही थे और नायिका थींशोभना समर्थविश्वकला मूवीटोनकीघूंघटवाली(1938),सागर मूवीटोनकीभोलेभालेऔरसाधना(1939),हिंदुस्तान सिनेटोनकीसौभाग्य (1940) जैसी फ़िल्मों के साथ प्रेम अदीब के करियर का ग्राफ  लगातार ऊपर उठता चला गया।

1941 में प्रदर्शित हुई फ़िल्मदर्शनके साथ ही प्रेम अदीब की एंट्रीप्रकाश पिक्चर्समें हुई। संगीतकार नौशाद के करियर की ये शुरूआती फ़िल्मों में से थी और चूंकि वो भी अवध (लखनऊ) के रहने वाले थे इसलिए जल्द ही प्रेम अदीब और नौशाद बहुत अच्छे दोस्त बन गए। साल 1942 में बनीप्रकाश पिक्चर्सकीभरत मिलापने प्रेम अदीब को एक नयी पहचान दी। साल 1942 में ही प्रेम अदीब कीप्रकाश पिक्चर्सके बैनर में बनींचूड़ियांऔरस्टेशन मास्टरऔरहिंदुस्तान सिनेटोनकीस्वामीनाथप्रदर्शित हुईं। और साल 1943 में प्रकाश पिक्चर्सके बैनर में बनी फ़िल्मरामराज्यका नाम तो हिंदी सिनेमा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हुआ।      

26 फरवरी 1943 को प्रेम अदीब की शादी हुई। श्रीमती प्रतिमा अदीब के अनुसार उसी साल अगस्त माह में विजय भट्ट ने जुहू-मुंबई के बिड़ला हाऊस में फ़िल्मरामराज्यका एक शो रखा। महात्मा गांधी उन दिनों मुंबई में ही थे। विजय भट्ट के आग्रह पर उन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम में से 10 मिनट के लिए उस शो के दौरान मौजूद रहने पर हामी भर दी थी। 10 मिनट गुज़र जाने पर अपने सेक्रेट्री के याद दिलाने के बावजूद उन्होंने बाक़ी कार्यक्रम कैंसिल किए और पूरी फ़िल्म देखी थी।   

प्रेम अदीब ने आगे चलकरभाग्यलक्ष्मी’, ‘चांद’, पुलिस(सभी 1944),आम्रपाली’, ‘विक्रमादित्य(दोनों 1945),महारानी मीनलदेवी’, ‘सुभद्रा’, ‘उर्वशी’, (1946),चन्द्रहास’, ‘गीत गोविंद’, ‘क़सम’, ‘मुलाक़ात’, ‘सती तोरल’, ‘वीरांगना(1947),एक्ट्रेस’, ‘अनोखी अदा’, ‘रामबाण (1948), भोली’, ‘हमारी मंज़िल’, ‘राम विवाह(1949),भाई बहन’, ‘प्रीत के गीत(1950),

भोला शंकर’, ‘लव कुश(1951),इंद्रासन’, ‘मोरध्वज’, ‘राजा हरिश्चन्द्र(1952), रामी धोबन(1953), हनुमान जन्म’, ‘महापूजा’, ‘रामायण’, शहीदे आज़म भगतसिंह(1954),भागवत महिमा’, ‘गंगा मैया’, ‘प्रभु की माया’, श्री गणेश विवाह(1955),दिल्ली दरबार’, ‘राजरानी मीरा’, ‘रामनवमी(1956),आधी रोटी’, चंडीपूजा’, ‘कृष्ण सुदामा’, ‘नीलमणि’, ‘राम हनुमान युद्ध(1957), गोपीचंद’, ‘रामभक्त विभीषण’, ‘तीसरी गली(1958),सम्राट पृथ्वीराज चौहान(1959),भक्तराजऔरअंगुलीमाल(दोनों 1960) जैसी फ़िल्मों में काम किया।
प्रेम अदीब प्रोडक्शंसके बैनर में उन्होंने दो फ़िल्मेंदेहाती(1947) औररामविवाह(1949) भी बनाई थीं, लेकिन फ़िल्मदेहातीमें उन्होंने अभिनय नहीं किया था। तलाक़’, ‘इंडस्ट्रियल इंडिया, भोलेभाले, साधना, सौभाग्य, दर्शन, चूड़ियां,  ‘स्टेशन मास्टर और पुलिस जैसी फ़िल्मों में उन्होंने कुछ गीत भी गाए थे।

श्रीमती प्रतिमा अदीब के दादा विशेश्वरनाथ कौल रेलवे में डिप्टी सुपरिंटेण्डेण्ट के ओहदे पर पहुंचने वाले पहले भारतीय थे। काश्मीरी मूल का कौल परिवार कई पीढ़ियों पहले लखनऊ में बसा था और 4 पीढ़ियों से रेलवे में नौकरी करता आया था। श्रीमती प्रतिमा अदीब के परदादा और पिता भी रेलवे में थे। 13 अगस्त 1922 को जन्माष्टमी के दिन जन्मीं श्रीमती प्रतिमा अदीब का नाम किशन रखा गया था। उनके पिता राजेश्वरनाथ कौल नौकरी के आख़िरी दिनों में लाहौर में तैनात थे और रिटायरमेंट के बाद उन्होंने लाहौर में ही मक़ान भी बनवा लिया था। 6 बहनों और 2 भाईयों में सबसे छोटी किशन कौल शादी के बाद श्रीमती प्रतिमा अदीब बनकर लाहौर से मुंबई चली आयी थीं।

उस ज़माने में सप्रू, जीवन, उल्हास और चन्द्रमोहन (चित्र में) जैसे कश्मीरी मूल के कई अभिनेता हिंदी फ़िल्मों में अपनी पहचान बना चुके थे और वो सभी प्रेम अदीब के क़रीबी दोस्तों में से थे। उल्हास अजमेर के रहने वाले थे और श्रीमती प्रतिमा अदीब की बड़ी बहन के जेठ के बेटे थे। प्रतिमा अदीब की सबसे बड़ी बहन और इंदिरा गांधी की सगी मामी शीला कौल कांग्रेस की जानी-मानी नेता थीं जो केन्द्र सरकार में कई अहम पदों पर रहीं। 97 साल की शीला कौल अब दिल्ली में रहती हैं। उधर अभिनेता चन्द्रमोहन मध्यप्रदेश में बसे काश्मीरी मूल के वट्टल परिवार से थे। श्रीमती प्रतिमा अदीब के अनुसार चन्द्रमोहन की ज़िंदगी का शुरूआती हिस्सा ग्वालियर में बीता था। हिंदी फ़िल्मों में चन्द्रमोहन ने जल्द ही बहुत ऊंचा मुक़ाम हासिल किया था। लेकिन अपनी कामयाबी को वो ज़्यादा समय क़ायम नहीं रख पाए और बहुत जल्द दयनीय हालात में उनका निधन भी हो गया था।

श्रीमती प्रतिमा अदीब के अनुसार फ़िल्मरामविवाह(1949) के निर्माण के दौरान एक कार दुर्घटना में प्रेम अदीब के गुर्दों को नुक़सान पहुंचा था, जिसका उनके रक्तचाप पर बुरा असर पड़ा था। 25 दिसम्बर 1959 की शाम वो वरली में श्रीमती प्रतिमा अदीब की बड़ी बहन के जन्मदिन की पार्टी में थे कि उनका रक्तचाप अचानक ही बढ़ा और ब्रेन-हैम्रेज से उनकी मृत्यु हो गयी। उस वक़्त उनकी उम्र महज़ 43 साल थी। अंगुलीमाल उनकी आख़िरी फ़िल्म थी जो उनके निधन के बाद प्रदर्शित हुई थी।

90 साल की श्रीमती प्रतिमा अदीब मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) की आज़ाद लेन में अपनी बेटी दामिनी और दामाद शैलेन सोहोनी के साथ रहती हैं। शैलेन सोहोनी विज्ञापन जगत का एक जाना-माना नाम हैं।

श्रीमती प्रतिमा अदीब से हमारी ये मुलाक़ात प्रेम अदीब के भाई के पौत्र और टीवी धारावाहिकों के जाने माने अभिनेता चैतन्य अदीब (चित्र में) के प्रयासों से हुई थी| चैतन्य द्वारा हाल ही में दी गयी जानकारी के अनुसार श्रीमती प्रतिमा अदीब का निधन मुम्बई में 29 दिसंबर 2016 को हुआ|


We are thankful to

Mr. Chaitanya Adib for arranging the meeting with Smt. Pratima Adib.

Delhi based film historian & writer Mr. Sanjeev Tanwar for providing the (extremely rare) picture of producer/director Mohan Sinha.

Mr. Harish Raghuvanshi & Mr. Harmandir Singh ‘Hamraz’ for their valuable suggestion, guidance and support.

Mr. S.M.M.Ausaja for providing movies’ posters & pictures.

Ms. Maitri Manthan for the English translation of the write up.

Mr. Manaswi Sharma for the technical support including video editing.


Manzil Ki Dhun Me Jhoomte” - Prem Adib

              ..............Shishir Krishna Sharma

It is often said that the only movie Gandhiji saw in his life was Ram Rajya. Made in 1943 under the banner of Prakash Pictures, this mythological movie was produced and directed by Vijay Bhatt. Lyricist of ‘Ram Rajya’ was Ramesh Gupta and the composer was Shankar Rao Vyas.  Actor who played Ram in this movie along with Shobhna Samarth in Sita’s role was Prem Adib, whose name is still afresh in the memories of Hindi Cine buffs of that era. Prem Adib, who started his acting career in mid-1930’s with social films became a household name as a star of mythological films in 1940’s. During a span of 25 years he acted in total 67 films but then his flourishing career ended abruptly with his sudden death. After lots of efforts, recently we met his wife Mrs. Pratima Adib and gathered all information about him.

Originally from Kashmir, Prem Adib’s forefathers migrated to the city of Faizabad in Awadh (now Uttar Pradesh) during the rule of Nawab Wajid Ali Shah of Awadh. His grandfather’s name was Devi Prasad Dar. Prem Adib’s father Ram Prasad Dar later shifted from Faizabad to settle in Sultanpur, where Prem Adib was born on 10th August 1916 and was called Shiv Prasad. According to Mrs. Pratima Adib, ‘Dar family’ was honored with ‘Adib’ by Nawab Wajid Ali Shah, the tile derived from Urdu term ‘Adab’ which means prevenance, thus the family came to be known as ‘Adib’.  

Since his childhood Prem Adib had a great inclination towards cinema. With the invent of Talkies, Kolkata and Lahore had also emerged as the centers of film making along with Mumbai. One fine day Prem Adib ran away from home and reached Kolkata with a desire to become an actor.  But all his efforts and struggle went futile thus compelling him to try his luck in Lahore.  with no success in Lahore as well, ultimately, he shifted to Mumbai.

Prem Adib debut film tiltled Romantic Indiareleased in the year 1936. Made under the banner of ‘Rajputana Films‘Romantic India’ was written and directed by Mohan Sinha. Music was composed by the well-known actor of his time Pandit Badri Prasad and Prem Adib’s co-artistes were Noorjehan, Snehlata, Shyam Sunder, Pandit Badri Prasad and a young boy from Kashmir named O.K.Dar who later became a household name as Jeevan. In place of his original name ‘Shiv Prasad’, Prem Adib was also given this screen name ‘Prem’ by Mohan Sinha.

(It is said that the actress Vidya Sinha is Mohan Sinha’s daughter but according to composer Omi ji of ‘Sonik Omi’ Mohan Sinha was Vidya Sinha’s maternal grandfather. Since Vidya Sinha’s mother passed away at the time of Vidya Sinha’s birth, Vidya Sinha was not only brought up by her maternal grandfather Mohan Sinha but was also given the same name Vidyaas her mother’s. Vidya Sinha’s father’s name was Sardar Man Singh Rana who produced film ‘Parwana’ in partnership with producer Mr.Haldiya with the name Comrade Pratap Rana and Vidya’ (1948) and Jeet’ (1949)  as an independent producer. Jeet was his first wife’s name who died very early. Later he married Mohan Sinha’s daughter Vidya. Comrade Pratap Rana was Omi ji’s maternal uncle thus Vidya Sinha is his cousin.)

Next to the film Romantic India’, Prem Adib acted in Dariyani Production’sFida-E-Watan’, ‘Pratima’ (both 1936) and Insaaf (1937), ‘Minerva MovietonesKhan Bahadur(1937) and Talaaq(1938). General Films1938 release Industrial Indiawas Prem Adibs debut film as Hero. This movie was also directed by Mohan Sinha. Shobhna Samarth was in the main lead opposite Prem Adib in ‘Industrial India’. And the with Vishwakala Movietones Ghoonghatwali(1938),Sagar MovietonesBhole Bhaleand Sadhna(1939), and Hindustan Cinetone’s Saubhagya’ (1940) Prem Adib’s career gradually gained momentum.

With the 1941 release Darshan, Prem Adib got an entry intoPrakash Pictures’. ‘Darshan’ was one of the earlier movies of composer Naushad’s who himself was from Awadh (Lucknow) thus Prem Adib and Naushad became good friends very soon. Prakash PicturesBharat Milapwhich released in 1942 gave Prem Adib a new kind of recognition. In the same year i.e. 1942 Prem Adib acted in Prakash Picture’sChooriyaanand Station Masterand Hindustan Cinetone’s Swaminath. He also sang one solo and one ensemble song in Station Masterunder the baton of Naushad. And the 1943 release Ram Rajyamade under the banner of ‘Prakash Pictures’ became a glittering name in the history of Hindi Cinema.      

Prem Adib got married on 26th February 1943. According to Mrs. Pratima Adib, same year in the month of August Vijay Bhatt organized a show of Ram Rajyaat Birla House situated at Juhu-Mumbai. At that time Gandhi ji was present in Mumbai only. He accepted Vijay Bhatt’s invitation to be present on the said occasion but only for 10 minutes due to his very tight schedule. After 10 minutes passed, Gandhi ji’s secretary reminded him of this but he was so engrossed in the movie that he asked his secretary to cancel all the appointments for the day and watched the complete film.

Later on Prem Adib acted in Bhagyalaxmi’, ‘Chaand’, ‘Police’ (all 1944), ‘Amrapali’, ‘Vikramaditya(both 1945),Maharani Minal Devi’, ‘Subhadra’, ‘Urvashi’, (1946),Chandrahas’, ‘Geet Govind’, ‘Kasam’, ‘Mulaqaat’, ‘Sati Toral’, ‘Veerangana(1947),Actress’, ‘Anokhi Ada’, ‘Rambaan(1948),Bholi’, ‘Hamari Manzil’, ‘Ram Vivah(1949),Bhai Bahen’, ‘Preet Ke Geet(1950),Bhola Shankar’, ‘Lav Kush(1951),Indrasan’, ‘Mordhwaj’, ‘Raja Harishchandra(1952),Rami Dhoban(1953),Hanuman Janm’, ‘Mahapooja’, ‘Ramayan’, Shheed-E-Azam Bhagat Singh(1954),Bhagwat Mahima’, ‘Ganga Maiya’, ‘Prabhu Ki Maya’, ‘Shri Ganesh Vivah(1955),Dilli Darbar’, ‘Rajrani Mira’, ‘Ram Navmi(1956),Adhi Roti’, ‘Chandi Pooja’, ‘Krishna Sudama’, ‘Neel Mani’, ‘Ram Hanuman Yuddh(1957),Gopichand’, ‘Rambhakt Vibhishan’, ‘Teesri Gali(1958),Samrat Prithviraj Chauhan(1959),Bhakt RajandAngulimal(both 1960). He also produced 2 filmsDehati(1947) and Ram Vivah(1949) under his own banner ‘Prem Adib Productionsbut kept himself away from acting in Dehati.

Mrs. Pratima Adib’s grandfather Visheshwar Nath Kaul was the first Indian to become a Deputy Superintendent in Railways. Originally from Kashmir, the Kaul family had migrated to Lucknow few generations back and were serving for Railways since 4 generations. Mrs. Pratima Adib’s great grandfather and father also served for the Railways. Mrs. Pratima Adib was born on the day of Janmashtami on 13th August 1922 and was named Kishan. Her father Rajeshwar Nath Kaul was posted at Lahore at the time of his retirement from the job and post retirement he settled in Lahore itself. Kishan Kaul, who was youngest among 6 sisters and 2 brothers shifted from Lahore to Mumbai as Mrs. Pratima Adib after her marriage.

By that time many actors of Kashmiri origin like Sapru, Jeevan, Ulhas and Chandra Mohan had already made their name in Hindi Cinema and all of them were good friends with Prem Adib. Ulhas, who hailed from Ajmer was the son of the elder brother of Mrs. Pratima Adib’s elder sister. Mrs. Pratima Adib’s eldest sister and Indira Gandhi’s maternal aunt Sheela Kaul was a well-known Congress leader who was also a minister in central government.  97 years old Sheela Kaul resides in Delhi now. Actor Chandra Mohan was from a Madhya Pradesh based Kashmiri ‘Wattal’ family. According to Mrs.Pratima Adib, Chandra Mohan’s earlier life was spent in Gwalior. Chandra Mohan instantly got success in films, but he could not retain it for long. Unfortunately, he died very soon in the state of penury.  

According to Mrs. Pratima Adib, during the making of the film Ram Vivah(1949) Prem Adib met with a car accident resulting into damage to his kidneys which badly affected his blood pressure. It was on 25th December 1959 when he was attending the birthday party of Mrs. Pratima Adib’s elder sister at her Worli-Mumbai residence that suddenly his blood pressure shot up resulting into brain hemorrhage and he passed away.  He was 43 at that time. Angulimal was his last film which released after his death.

90 years old Mrs.Pratima Adib resides in the Azad Lane of Mumbai’s Andheri (West) with her daughter Damini and Son in law Shailesh Sohoni who is a renowned name of the Ad-world.

Our meeting with Mrs.Pratima Adib was organized by the grandson of Prem Adib’s brother, Chaitanya Adib who is a well-known face of Hindi TV shows. As informed by Chaitanya, Mrs.Pratima Adib died on 29 December 2016. 

4 comments:

  1. सुंदर आलेख।
    ईस बार मुंबई की मुलाकात के दौरान आप के साथ श्रीमती अदीब से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वह मुलाकात काफी यादगार रही। तबसे यह आलेख की प्रतिक्षा थी।
    फिर से एक बार धन्यवाद।

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  2. Smply superb !
    Sharmaji,mere paas shabd nahin hain aapki taareef ke liye.
    Thank you very much .you are doing a great job.Please continue.
    -Arunkumar Deshmukh

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  3. Bahut hi sundar ... Aesi jankari aur kahin bhi available nahi

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  4. Thank you Shishirji, I’m glad I read the comprehensive write up on Prem Adib again. I learned about the passing of Shrimati Pratima Adib in 2016. I regret not having the courage to go visit her after I met you in December 2015 at the home of Shri Arunkumar Deshmukh. As I told later my mother Indurani and Prem Adib acted together in two films Fidaye Watan and Insaaf. That affair resulted in my birth in early.January 1938. Had I met Mrs. Adib, she would have seen what Prem Adib may have looked like at age 78.

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